लावारिस पड़ा पैसा ढूँढना

7 अगस्त 2026 · पढ़ने में 7 मिनट

UDGAM पर लावारिस बैंक जमा कैसे ढूँढें और वापस पाएँ

30 जून 2026 तक RBI के लावारिस जमा वाले फ़ंड में 86,917 करोड़ रुपये पड़े थे। UDGAM सरकारी और मुफ़्त पोर्टल है, जो एक साथ 30 बैंकों में खोजता है। यहाँ ठीक-ठीक लिखा है कि रजिस्टर कैसे करें, कैसे खोजें, नतीजे कैसे पढ़ें, और बैंक में दावा कैसे करें, चाहे खाता आपका हो या किसी दिवंगत परिजन का।

अगर किसी बैंक खाते में 10 साल तक कोई लेन-देन न हो, तो उसमें रखा पैसा RBI के Depositor Education and Awareness (DEA) Fund में चला जाता है। संसद में वित्त मंत्रालय के जवाब के मुताबिक़, 30 जून 2026 तक इस फ़ंड में 86,917 करोड़ रुपये जमा थे। इसमें से कुछ भी डूबा नहीं है। यह सारा पैसा कभी भी, बिना कोई फ़ीस दिए वापस लिया जा सकता है।

दिक़्क़त हमेशा उसे ढूँढने की रही: कौन-सा बैंक, कौन-सी ब्रांच, किसके नाम। 2023 में RBI ने इसका ज़्यादातर हल UDGAM (Unclaimed Deposits, Gateway to Access inforMation) से निकाल दिया। यह एक ही पोर्टल है, जो 30 बैंकों में लावारिस जमा खोजता है, और इतने में क़रीब 90 प्रतिशत लावारिस पैसा आ जाता है। यह गाइड पूरी प्रक्रिया समझाती है, यह भी कि खाता किसी ऐसे व्यक्ति का हो जिनका देहांत हो चुका है, तो क्या करना है।

ज़रूरी बात। UDGAM मुफ़्त है, और दावा करना भी मुफ़्त है। आपका अपना पैसा लौटाने के लिए न कोई सरकारी पोर्टल फ़ीस लेता है, न कोई बैंक, और कोई सच्चा अधिकारी कभी फ़ोन करके OTP नहीं माँगता। जो कोई फ़ीस या कोड माँगे, वह ठगी कर रहा है।

मुफ़्त टूल। पाँच सवालों के जवाब दीजिए और अपने हिसाब से बनी दावे की योजना पाइए, पत्र भी लिखे-लिखाए: रिकवरी नेविगेटर खोलिए।

UDGAM क्या करता है, और क्या नहीं

UDGAM खोजने का ज़रिया है। यह बताता है कि कोई लावारिस जमा है या नहीं, किस बैंक में है, और आपको एक reference number देता है। असली दावा तो बैंक में ही करना होता है। यानी सफ़र के दो हिस्से हैं: पहले UDGAM पर ढूँढिए, फिर बैंक में दावा कीजिए।

यह पोर्टल सिर्फ़ बैंक जमा के लिए है। इसमें डाकघर की बचत, EPF, बीमा, शेयर या म्यूचुअल फ़ंड शामिल नहीं हैं। उनके अपने अलग पोर्टल हैं, जिन पर हमारी अलग गाइड्स हैं।

कदम 1: UDGAM पर रजिस्टर कीजिए

  1. udgam.rbi.org.in पर जाइए (बिलकुल यही पता, मिलती-जुलती वेबसाइटों पर ध्यान मत दीजिए)।
  2. Register पर क्लिक कीजिए, और अपना मोबाइल नंबर व नाम भरिए।
  3. एक पासवर्ड बनाइए, captcha भरिए, और फ़ोन पर आए OTP से पुष्टि कीजिए।

रजिस्ट्रेशन में क़रीब दो मिनट लगते हैं, और फ़ोन नंबर के अलावा कुछ नहीं चाहिए।

कदम 2: जमा को खोजिए

लॉग-इन कीजिए और जिस खाताधारक को खोज रहे हैं, उनके ब्योरे भरिए। सिर्फ़ अपने लिए खोजने की बंदिश नहीं है, आप माता-पिता या किसी रिश्तेदार के लिए भी खोज सकते हैं।

जानकारीक्या भरना है
खाताधारक का नामजैसा बैंक के रिकॉर्ड में था। नाम की अलग-अलग स्पेलिंग भी आज़माइए।
बैंकएक, कई, या सूची के सारे बैंक चुन सकते हैं
कोई एक पहचानइनमें से कोई एक: PAN, voter ID, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, पासपोर्ट नंबर, या जन्म तिथि

सुझाव। पुराने खातों में नाम अक्सर पुरानी स्पेलिंग में लिखा होता है। अगर “Ramesh Kumar” से कुछ न मिले, तो “R Kumar”, “Ramesh Kumar Sharma” और सिर्फ़ शुरुआती अक्षर भी आज़माइए। उस व्यक्ति का PAN न हो तो जन्म तिथि से खोजिए।

कदम 3: नतीजे पढ़िए और UDRN लिख लीजिए

अगर कोई मिलान मिलता है, तो UDGAM हर लावारिस खाते के लिए बैंक, ब्रांच और एक reference number दिखाता है, जिसे UDRN (Unclaimed Deposit Reference Number) कहते हैं। खाते में कितना पैसा है, यह वह नहीं बताता। वह बैंक दावे के समय बताता है। हर UDRN लिख लीजिए, स्क्रीनशॉट ले लीजिए, और साथ में यह भी लिखिए कि वह किस बैंक और किस ब्रांच का है।

कदम 4: बैंक में दावा कीजिए

UDRN लेकर बैंक जाइए, या तो ब्रांच में, या बैंक की अपनी ऑनलाइन दावा प्रक्रिया से (हर बैंक अपनी प्रक्रिया UDGAM पर भी बताता है)।

अगर खाता आपका अपना है:

काग़ज़ब्योरा
दावा फ़ॉर्मबैंक का अपना फ़ॉर्म
UDRNUDGAM से मिला हुआ
PAN और Aadhaarआम KYC
पते का सबूतअगर आपका पता बदल गया है
पुरानी पासबुक, चेकबुक या FD रसीदमदद करती है, हमेशा ज़रूरी नहीं

बैंक KYC जाँचता है, खाते को फिर चालू करता है या उसे निपटाता है, और जमा रक़म चुका देता है। बचत जमा पर ब्याज DEA Fund में रहते हुए भी जुड़ता रहता है, इसलिए आपको मूल रक़म के साथ ब्याज भी मिलता है।

अगर खाताधारक का देहांत हो चुका है:

तब आपको UDGAM के reference के साथ बैंक की मृतक-दावा प्रक्रिया से गुज़रना होगा:

  • मृत्यु प्रमाण पत्र (प्रमाणित कॉपी)
  • आपकी पहचान और KYC के काग़ज़
  • आपका दावा करने का हक़ साबित करने वाला सबूत: नॉमिनेशन, या legal heir के काग़ज़

ज़रूरी बात। मृतक ग्राहकों के दावों पर RBI के 2025 के Directions के अनुसार, अगर आप नॉमिनी या जीवित सह-धारक हैं, तो रक़म चाहे जितनी हो, बैंक succession certificate या अदालत का आदेश माँग ही नहीं सकता। नॉमिनी न होने पर भी बैंकों को 15 लाख रुपये तक के दावे (सहकारी बैंकों में 5 लाख रुपये तक) आसान प्रक्रिया से निपटाने होते हैं: दावा फ़ॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, पहचान का सबूत, एक indemnity bond, और legal heir certificate या एक स्वतंत्र घोषणापत्र। अगर कोई बैंक छोटे और बिना विवाद वाले दावे पर succession certificate माँगे, तो शालीनता से इन्हीं Directions का हवाला दीजिए और बात ब्रांच मैनेजर तक ले जाइए।

अगर बैंक सचमुच क़ानूनी काग़ज़ माँगे, तो हमारी पूरी गाइड succession certificate बनाम legal heir certificate पढ़िए।

कितना समय लगता है

चरणआमतौर पर लगने वाला समय
UDGAM पर रजिस्ट्रेशन और खोज10 से 15 मिनट
नॉमिनी वाला दावा, या अपना ही खाताकुछ दिन से 2 हफ़्ते
मृतक का दावा, नॉमिनी नहीं, तय सीमा के भीतर2 से 6 हफ़्ते
विवादित दावे, या तय सीमा से ऊपर के दावेकई महीने, अदालती प्रक्रिया

इस समय बैंकों पर तेज़ी से काम करने का दबाव है: RBI सितंबर 2026 तक एक प्रोत्साहन योजना चला रहा है, जिसमें हर लावारिस जमा लौटाने पर बैंकों को पैसा मिलता है। दावा करने के लिए इससे बेहतर समय पहले कभी नहीं आया।

दावे अक्सर किन वजहों से अटकते हैं

  • पुराने बैंक रिकॉर्ड और आज की पहचान में नाम का मेल न खाना। नाम बदलने की वजह बताने वाला विवाह प्रमाण पत्र या शपथ पत्र साथ ले जाइए।
  • सिर्फ़ एक ही स्पेलिंग या सिर्फ़ एक ही बैंक में खोजना।
  • मृत्यु प्रमाण पत्र की कॉपियाँ कम पड़ जाना। 10 से 15 प्रमाणित कॉपियाँ बनवा लीजिए, हर संस्था एक अपने पास रख लेती है।
  • यह मान लेना कि 10 साल बाद पैसा चला गया। ऐसा नहीं है। DEA Fund से दावा करने की कोई आख़िरी तारीख़ नहीं है।

सहेजने लायक़ चेकलिस्ट

  • अपने फ़ोन नंबर से udgam.rbi.org.in पर रजिस्टर कीजिए।
  • परिवार के हर बुज़ुर्ग का नाम खोजिए, स्पेलिंग बदल-बदलकर भी।
  • हर UDRN, और उसका बैंक व ब्रांच लिख लीजिए।
  • KYC के काग़ज़ इकट्ठे कीजिए, और दिवंगत व्यक्ति के खातों के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और नॉमिनेशन या वारिसी के काग़ज़ भी।
  • बैंक में दावा दाख़िल कीजिए, और हर हफ़्ते हाल पूछते रहिए।
  • साल में एक बार यह खोज दोहराइए, क्योंकि जैसे-जैसे खाते 10 साल के होते हैं, नए खाते इसमें जुड़ते जाते हैं।

वह हिस्सा, जो कोई पोर्टल ठीक नहीं कर सकता

UDGAM इसलिए बना क्योंकि लाखों परिवारों को कभी पता ही नहीं चला कि कोई खाता है। खोज तो इलाज है, बीमारी यह है कि जानकारी सिर्फ़ एक इंसान के दिमाग़ में रहती थी। Parampara वह जगह है जहाँ आप हर खाता, हर जमा और हर पॉलिसी तभी लिख देते हैं, जब आप ख़ुद उन्हें याद रखने के लिए मौजूद हैं, और वह ऐसे बंद रहती है कि सिर्फ़ आपका परिवार पढ़ सके। 10 मिनट लिख लेने से उन्हें 10 साल की अनजान भटकन से बचाया जा सकता है।

जो भी हो, आपके परिवार को पता होगा कि कहाँ देखना है।

इस लेख में जिन चीज़ों की बात है, उन सबके लिए Parampara एक निजी, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड वॉल्ट है: पॉलिसियाँ, खाते, वसीयत कहाँ रखी है। हम उसमें कुछ नहीं पढ़ सकते। आपका परिवार पढ़ सकता है, जब ज़रूरत पड़े।

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