हमारे बारे में
ताकि कोई परिवार कभी
ढूँढता न रह जाए।
यह अक्सर परिवार के सबसे मुश्किल हफ़्ते में होता है। किसी का देहांत हो जाता है, और उनके अपने ढूँढते रह जाते हैं। दराज़ों और पुरानी फ़ाइलों में, यह जोड़ने की कोशिश में कि बीमा कहाँ था, किस बैंक में जमा थी, वसीयत थी भी या नहीं।
जो पैसा उनका था, वह बिना क्लेम रह जाता है। इसलिए नहीं कि छिपाया गया था, बल्कि इसलिए कि किसी ने लिखकर नहीं रखा कि वह मिलेगा कहाँ। पूरे भारत में ₹1.84 लाख करोड़ से ज़्यादा ठीक इसी वजह से लावारिस पड़े हैं। आँकड़े देखें
Parampara हमारा जवाब है। एक शांत, निजी जगह, जहाँ वह सब कुछ रहे जो आपके परिवार को एक दिन चाहिए होगा। आपके रहते सहेजा हुआ, ताकि उन्हें कभी अंदाज़े न लगाने पड़ें।
हम क्या मानते हैं
वे उसूल, जिनसे हम कभी नहीं हटेंगे।
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बनावट से ही निजी
हमने Parampara ऐसा बनाया है कि हम आपका वॉल्ट पढ़ ही नहीं सकते। यह कोई वादा नहीं, यह ऐसा काम है जो हम कर ही नहीं सकते।
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हम आपको कुछ बेचते नहीं
न कोई प्रोडक्ट थोपा जाता है, न कोई डेटा बेचा जाता है। हमारा एक ही काम है: आपके परिवार की जानकारी सुरक्षित रहे और ज़रूरत पर मिल जाए।
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हमारे परिवारों के लिए बना
भारत में बना, उसी ढंग पर जैसे हमारे घर सच में अपनी चीज़ें सँभालते हैं, परिवार की हर पीढ़ी के साथ।
इसके पीछे कौन है
परंपरा
वह, जो एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी को सौंपा जाता है।
हम उसी की हिफ़ाज़त करना चाहते हैं: सिर्फ़ काग़ज़ और पासवर्ड नहीं, बल्कि उनके साथ जुड़ी परवाह भी। Parampara बेंगलुरु में एक छोटी सी टीम बना रही है, जिसे इसे ठीक से बनाने की परवाह है। इसकी नींव Varun Rao ने रखी।
कोई सवाल, या बस दुआ-सलाम? support@myparampara.in पर लिखिए।