4 अगस्त 2026
MITRA से अपने परिवार के भूले हुए म्यूचुअल फंड कैसे खोजें
SEBI का MITRA प्लेटफ़ॉर्म, जो 2025 में शुरू हुआ, दस साल से बिना छुए पड़े म्यूचुअल फंड फ़ोलियो को हर फंड हाउस में एक साथ खोजता है। यहाँ पढ़िए कि सिर्फ़ एक PAN से खोज कैसे करनी है, जो मिले उसका क्या करना है, और कानूनी वारिस दिवंगत निवेशक की यूनिट कैसे अपने नाम कराते हैं।
म्यूचुअल फंड के निवेश का हिसाब खो जाना सबसे आसान है। न कोई पासबुक होती है, न कोई ब्रांच, और अगर निवेशक ने स्टेटमेंट खोलने बंद कर दिए, तो 2009 की एक SIP पंद्रह साल तक चुपचाप ऐसे फ़ोलियो में बढ़ती रह सकती है जिसका परिवार में किसी को पता ही नहीं। बैंक खाते से उलट, भूला हुआ म्यूचुअल फंड अक्सर पूरे समय बढ़ता रहता है, और इसीलिए परिवार को दोबारा मिलने वाली चीज़ों में ये सबसे कीमती होती हैं।
2025 की शुरुआत में SEBI ने MITRA (Mutual fund Investment Tracing and Retrieval Assistant) शुरू किया। यह पूरे उद्योग का साझा प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे दोनों रजिस्ट्रार, CAMS और KFin Technologies, मिलकर चलाते हैं, और यह हर फंड हाउस के निष्क्रिय फ़ोलियो एक साथ खोजता है। MITRA से पहले हर AMC से अलग-अलग पूछना पड़ता था। अब एक PAN की खोज पूरे बाज़ार को ढक लेती है।
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कौन सा फ़ोलियो निष्क्रिय माना जाता है
MITRA उन फ़ोलियो को दिखाता है जिनमें दस साल से निवेशक की तरफ़ से कोई लेन-देन नहीं हुआ, न पैसे वाला और न बिना पैसे वाला, लेकिन खाते में यूनिट अब भी मौजूद हैं। चलती रही SIP से फ़ोलियो सक्रिय नहीं माना जाता; देखा यह जाता है कि निवेशक ने खुद कुछ किया या नहीं। अगर उस व्यक्ति ने दस साल पहले बस लेन-देन करना बंद कर दिया था, तो फ़ोलियो यहाँ दिख जाएगा।
कदम 1: MITRA पर खोजिए
- MF Central के ज़रिए MITRA खोलिए (mfcentral.com; निष्क्रिय फ़ोलियो की खोज का लिंक उसके होम पेज पर है, और SEBI, AMFI तथा हर AMC की साइट पर भी दिया है)।
- जिस व्यक्ति को खोज रहे हैं, उनका PAN डालिए।
- एक मोबाइल नंबर या ईमेल दर्ज कीजिए और OTP से पुष्टि कीजिए।
- जो और जानकारी आपको मालूम है, वह भी जोड़ दीजिए ताकि खोज सटीक हो: जन्म तारीख़, पुराने पते या PIN कोड, बैंक खाता नंबर, ईमेल ID।
छोटी सलाह। आप सिर्फ़ अपने लिए नहीं, अपने माता-पिता या दादा-दादी के लिए भी खोज सकते हैं। अगर उनका PAN आपके पास नहीं है, तो उसे पुराने इनकम टैक्स के कागज़ों, बीमा के दस्तावेज़ों या बैंक के KYC रिकॉर्ड में देखिए। भारत में हर वित्तीय खोज की मास्टर चाबी PAN ही है।
कदम 2: नतीजे पढ़िए
MITRA वे फ़ोलियो दिखाता है जो मेल खाते हैं: फंड हाउस, फ़ोलियो नंबर, और उसे संभालने वाला रजिस्ट्रार (CAMS या KFin)। सब कुछ लिख लीजिए। यहाँ से आगे का काम फंड हाउस या रजिस्ट्रार के पास चला जाता है, क्योंकि MITRA निवेश खोजता है; पैसा नहीं देता।
कदम 3A: अगर निवेशक जीवित हैं
रास्ता है फ़ोलियो दोबारा चालू कराना, और उसमें ज़्यादातर काम KYC को नया कराने का ही है:
- आज के नियमों के हिसाब से KYC पूरी या अपडेट कराइए: PAN, Aadhaar, पता, और सबसे ज़रूरी, चालू मोबाइल नंबर और ईमेल, क्योंकि पुराने फ़ोलियो में अक्सर बंद हो चुके संपर्क दर्ज होते हैं।
- फ़ोलियो पर नॉमिनी जोड़िए या बदलिए; बिना नॉमिनी वाले फ़ोलियो पर रोक लगती है, और पैसा दोबारा लावारिस ऐसे ही बनता है।
- KYC नई हो जाने के बाद निवेशक पैसा निकाल सकते हैं, दूसरी स्कीम में बदल सकते हैं, या बस निवेश बना रहने दे सकते हैं, जो अब एक साथ बनने वाले स्टेटमेंट में दिखता रहेगा।
कदम 3B: अगर निवेशक का देहांत हो चुका है
इस प्रक्रिया को transmission कहते हैं: यूनिट को नॉमिनी या कानूनी वारिसों के नाम करना। यह काम AMC या उसके रजिस्ट्रार के पास होता है, MITRA पर नहीं।
| स्थिति | ज़रूरी दस्तावेज़ |
|---|---|
| नॉमिनी दर्ज है | Transmission request form, मृत्यु प्रमाणपत्र (सत्यापित), नॉमिनी की KYC, नॉमिनी के बैंक की जानकारी और रद्द किया हुआ चेक |
| नॉमिनी नहीं है, रकम छोटी है | ऊपर वाले सब, और साथ में कानूनी वारिस का प्रमाण और indemnity bond; एक तय रकम से नीचे रजिस्ट्रार आसान दस्तावेज़ भी मान लेते हैं, और यह सीमा हर फंड हाउस में अलग होती है |
| नॉमिनी नहीं है, रकम बड़ी है | ऊपर वाले सब, और साथ में succession certificate, probate या letters of administration |
हर AMC अपनी transmission किट ऑनलाइन डालती है, और CAMS और KFin दोनों के पास इसके लिए अलग डेस्क हैं। अगर निवेश एक ही रजिस्ट्रार के तहत कई फंड हाउसों में फैला है, तो अक्सर सत्यापित दस्तावेज़ों का एक ही सेट कई क्लेमों के काम आ जाता है। succession certificate और legal heir certificate का फ़र्क समझाने वाला हमारा गाइड इन कानूनी दस्तावेज़ों को आसान भाषा में बताता है।
ध्यान दीजिए। transmission के दौरान यूनिट आम तौर पर निवेश में ही बनी रहती हैं, यानी ट्रांसफ़र पूरा होने तक पैसा बाज़ार के साथ घटता-बढ़ता रहता है। कोई तारीख़ सिर पर नहीं है, लेकिन क्लेम टालते रहने की भी कोई वजह नहीं है; NAV कागज़ी कार्रवाई का इंतज़ार नहीं करता।
कितना समय लगता है
| चरण | आम तौर पर लगने वाला समय |
|---|---|
| MITRA पर खोज | 10 मिनट |
| KYC नई कराना और फ़ोलियो चालू कराना | कुछ दिन से 2 हफ़्ते |
| नॉमिनी के साथ transmission | पूरे दस्तावेज़ जमा होने के बाद 2 से 4 हफ़्ते |
| कानूनी वारिसों के ज़रिए transmission | 1 से 3 महीने, अदालती दस्तावेज़ लगें तो और ज़्यादा |
आम अड़चनें
- KYC पुरानी स्थिति में अटकी हुई। 2012 से पहले के फ़ोलियो अक्सर आज की KYC व्यवस्था से भी पुराने होते हैं। किसी भी KRA पर नई KYC करा लेने से बात बन जाती है।
- फ़ोलियो, PAN और Aadhaar में नाम का मेल न होना। ज़्यादातर मामले हलफ़नामे और विवाह प्रमाणपत्र से सुलझ जाते हैं।
- संयुक्त धारकों में से एक का देहांत। इसमें मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ नाम हटाने की अर्ज़ी देनी होती है, जो पूरे transmission से आसान है और तुरंत कर लेनी चाहिए।
- कागज़ के ज़माने की यूनिट। बहुत पुराने निवेश सर्टिफ़िकेट के रूप में या बंद हो चुकी स्कीमों में हो सकते हैं; रजिस्ट्रार उनकी जगह आई नई स्कीमों का पता लगाता है। यहाँ सब्र काम आता है।
सहेज लेने वाली सूची
- परिवार के हर बुज़ुर्ग का PAN इकट्ठा कीजिए; हर खोज उन्हीं से खुलती है।
- हर PAN को MITRA पर चलाइए, और खोज को सटीक बनाने के लिए जन्म तारीख़ तथा पुराने पते भी डालिए।
- जो भी मिले, उसका फंड हाउस, फ़ोलियो नंबर और रजिस्ट्रार लिख लीजिए।
- निवेशक जीवित हैं: KYC नई कराइए, संपर्क की जानकारी अपडेट कीजिए, नॉमिनी जोड़िए।
- निवेशक का देहांत हो चुका है: सत्यापित दस्तावेज़ों के साथ AMC या रजिस्ट्रार के पास transmission की अर्ज़ी दीजिए।
- साल में एक बार MITRA दोबारा देखिए; फ़ोलियो लगातार दस साल की रेखा पार करते रहते हैं।
अच्छी ख़बर में छिपा सबक
पंद्रह साल तक बढ़ता रहा कोई भूला हुआ म्यूचुअल फंड मिल जाए, तो वह अचानक मिली दौलत लगती है। असल में वह एक चेतावनी है: जिस ख़ामोशी ने उसे परिवार से छिपाए रखा, वही उसे हमेशा के लिए छिपा भी सकती थी। Parampara वह निजी तिजोरी है जहाँ आप हर फ़ोलियो, हर SIP और हर नॉमिनी को तभी लिख देते हैं जब सब कुछ ताज़ा है, ताकि आपके परिवार को जानकारी विरासत में मिले, खज़ाने की खोज नहीं।
जो भी हो, आपके परिवार को पता होगा कि कहाँ देखना है।
इस लेख में जिन चीज़ों की बात है, उन सबके लिए Parampara एक निजी, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड वॉल्ट है: पॉलिसियाँ, खाते, वसीयत कहाँ रखी है। हम उसमें कुछ नहीं पढ़ सकते। आपका परिवार पढ़ सकता है, जब ज़रूरत पड़े।
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