3 अगस्त 2026
IEPF में फँसे शेयर और डिविडेंड कैसे वापस पाएँ: पूरी गाइड
7 साल तक डिविडेंड पर कोई दावा न हो, तो शेयर भी सरकार के IEPF में चले जाते हैं। कई परिवारों ने इसी रास्ते लाखों के शेयर वापस पाए हैं। यहाँ IEPF-5 की पूरी प्रक्रिया है, ज़रूरी काग़ज़, सच्ची समय-सीमा, और यह भी कि legal heirs दिवंगत निवेशक के शेयर कैसे वापस लेते हैं।
एक नियम, जो निवेश करने वाले ज़्यादातर परिवारों को पता ही नहीं होता: अगर किसी शेयर का डिविडेंड लगातार 7 साल तक कोई नहीं लेता, तो क़ानून सिर्फ़ डिविडेंड अलग रखकर नहीं बैठ जाता। शेयर भी निवेशक के नाम से हटकर सरकार के Investor Education and Protection Fund (IEPF) में चले जाते हैं।
दादाजी के नाम के Infosys या Reliance के शेयर परिवार की नज़र से इसी तरह चुपचाप ओझल हो जाते हैं: डिविडेंड पुराने पते पर पहुँचना बंद हुआ, 7 साल बीत गए, और शेयर IEPF में चले गए। अच्छी ख़बर: कुछ भी डूबता नहीं है। असली मालिक, या उसके legal heirs, शेयर और जमा हुआ एक-एक डिविडेंड कभी भी, बिना कोई फ़ीस दिए वापस ले सकते हैं। सच्ची बात यह भी है: वापसी की सारी प्रक्रियाओं में यह सबसे धीमी और सबसे ज़्यादा काग़ज़ों वाली है। इसीलिए एजेंटों का एक पूरा धंधा चलता है, जो यही काम करने के लिए वापस मिली रक़म का 5 से 15 प्रतिशत लेते हैं। यह गाइड इसलिए है कि आप यह काम ख़ुद कर सकें।
मुफ़्त टूल। पाँच सवालों के जवाब दीजिए और अपने हिसाब से बनी दावे की योजना पाइए, पत्र भी लिखे-लिखाए: रिकवरी नेविगेटर खोलिए।
कदम 1: पहले पक्का कीजिए कि IEPF के पास क्या है
- iepf.gov.in पर मौजूद search सुविधा से निवेशक का नाम और कंपनी खोजिए।
- कंपनी की वेबसाइट पर मिलान कीजिए: लिस्टेड कंपनियों को IEPF में भेजे गए शेयरों और डिविडेंड की सूची छापनी ही होती है, जो आमतौर पर Investor Relations वाले हिस्से में मिलती है।
- पुराने काग़ज़ बहुत काम आते हैं: घर की फ़ाइलों में मिले share certificate, डिविडेंड वारंट, demat statement, या registrar (RTA) की चिट्ठियाँ।
कंपनी का नाम, folio number या demat के ब्योरे, और मोटे तौर पर कितने शेयर हैं, यह सब लिख लीजिए। हर कंपनी के लिए अलग दावा करना पड़ता है।
ज़रूरी बात। एक समय में एक कंपनी के एक folio पर सिर्फ़ एक ही IEPF-5 दावा चल सकता है, और दावा ख़ारिज हुआ तो सब कुछ फिर से शुरू करना पड़ता है। जल्दी दाख़िल करने से बेहतर है कि एक ही बार, पूरा और सही दाख़िल किया जाए।
कदम 2: दाख़िल करने से पहले क्या-क्या चाहिए
| क्या चाहिए | ब्योरा |
|---|---|
| दावा करने वाले का PAN और Aadhaar | पैसा सिर्फ़ Aadhaar से जुड़े बैंक खाते में ही आता है |
| एक demat खाता | वापस मिले शेयर demat रूप में ही आते हैं, ज़रूरत हो तो पहले खुलवा लीजिए |
| Cancelled cheque | उसी खाते का, जो Aadhaar से जुड़ा है |
| हक़ का सबूत | share certificate, folio के ब्योरे, डिविडेंड वारंट, या RTA की चिट्ठियाँ |
| Indemnity bond | non-judicial stamp paper पर, जिसका फ़ॉर्मैट IEPF के नियमों में तय है |
| Advance stamped receipt | जिस पर दावा करने वाले और गवाहों के हस्ताक्षर हों |
अगर असली निवेशक का देहांत हो चुका है, तो इनके साथ यह भी जोड़िए: मृत्यु प्रमाण पत्र और transmission के काग़ज़। जहाँ शेयर संयुक्त नाम पर थे या नॉमिनी दर्ज है, वहाँ रास्ता आसान है। जहाँ नहीं, वहाँ legal heir का सबूत चाहिए, और बड़े निवेश के लिए succession certificate या probate। कंपनी का registrar आमतौर पर यही चाहेगा कि शेयरों का transmission IEPF के दावे के साथ-साथ या उससे पहले पूरा हो जाए। उस हिस्से के लिए हमारी succession बनाम legal heir वाली गाइड पढ़िए।
कदम 3: webform IEPF-5 भरिए
- MCA portal (mca.gov.in, यानी V3 सिस्टम) पर रजिस्टर कीजिए या लॉग-इन कीजिए, और webform IEPF-5 खोलिए।
- दावा करने वाले के ब्योरे, कंपनी, folio या demat की जानकारी, कितने शेयर और कितनी रक़म का दावा है, और Aadhaar से जुड़ा बैंक खाता भरिए।
- ऑनलाइन जमा कीजिए। एक SRN (Service Request Number) बनता है। उसे सँभालकर रखिए, आगे की हर बात इसी नंबर से पता चलेगी।
- भरा हुआ फ़ॉर्म डाउनलोड करके प्रिंट कीजिए।
कदम 4: काग़ज़ों की फ़ाइल कंपनी को भेजिए
कंपनी के registered office में Nodal Officer (IEPF) के नाम एक लिफ़ाफ़ा डाक से भेजिए, जिस पर “Claim for refund from IEPF Authority” लिखा हो। उसमें ये चीज़ें रखिए:
- प्रिंट किया हुआ, हस्ताक्षर किया हुआ IEPF-5 फ़ॉर्म, जिस पर SRN दर्ज हो
- indemnity bond और advance receipt, असली वाले
- हर सबूत की ख़ुद से अटेस्टेड कॉपी, और cancelled cheque
- वारिसों के लिए: मृत्यु, transmission और वारिसी से जुड़े काग़ज़
इसके बाद MCA portal पर वापस जाइए और pending-action वाले टैब में अपने SRN के सामने डाक रसीद के ब्योरे दर्ज कीजिए, इसी से दावा आगे बढ़ता है। पूरी फ़ाइल की फ़ोटोकॉपी अपने पास रखिए।
कदम 5: जाँच और भुगतान
- कंपनी आपके दावे की जाँच करती है और अपनी verification report IEPF Authority को भेजती है। नियमों में कंपनियों को इसके लिए 30 दिन मिलते हैं।
- IEPF Authority दावे को परखती है, कुछ बातें साफ़ करने को कह सकती है (उनका जवाब जल्दी दीजिए, देर होने पर लाइन में फिर पीछे लगना पड़ता है), और फिर मंज़ूरी देती है।
- मंज़ूरी के बाद शेयर आपके demat खाते में आ जाते हैं, और डिविडेंड व बाकी रक़म बैंक खाते में।
असली समय कितना लगता है
काग़ज़ पर यह प्रक्रिया 60 से 90 दिन की लगती है। हक़ीक़त में, हाल में दाख़िल हुए दावों में कई महीने लगे हैं, और 2025 के स्वतंत्र विश्लेषणों के मुताबिक़ शुरू से आख़िर तक औसतन क़रीब 21 महीने। अक्टूबर 2025 में नियमों में फिर बदलाव हुआ ताकि प्रक्रिया के कुछ हिस्से आसान हो जाएँ, और अटके मामले निपटाने का सरकारी दबाव भी बढ़ रहा है। फिर भी मन इसी बात का बना लीजिए कि यह लंबी लड़ाई है, कोई छोटी दौड़ नहीं:
| चरण | असल में लगने वाला समय |
|---|---|
| काग़ज़ तैयार करना | 2 से 6 हफ़्ते |
| कंपनी की verification report | असल में 1 से 6 महीने |
| IEPF Authority की प्रक्रिया | असल में 6 से 18 महीने |
सुझाव। हर महीने कंपनी के nodal officer को लिखकर याद दिलाइए (उनका ईमेल कंपनी की वेबसाइट पर छपा होना ज़रूरी है), MCA portal पर अपना SRN देखते रहिए, और बहुत दिनों से अटके दावों की शिकायत IEPF Authority के grievance रास्तों से कीजिए। लगे रहने से इंतज़ार सचमुच कम होता है।
दावे ख़ारिज क्यों होते हैं
- PAN, Aadhaar, पुराने folio और बैंक के रिकॉर्ड में नाम अलग-अलग होना, और उसे समझाने वाला कोई शपथ पत्र न लगाना।
- indemnity bond या advance receipt की असली प्रति न भेजना।
- हक़ साबित न होना: न कोई certificate, न folio number, न RTA की पुष्टि।
- दिवंगत निवेशक के शेयरों का transmission निपटे बिना ही दावा दाख़िल कर देना।
- एक दावा चल ही रहा हो, और उसी पर दूसरा दावा दाख़िल कर देना।
सहेजने लायक़ चेकलिस्ट
- iepf.gov.in और कंपनी की IEPF सूचियों में खोजिए, और हर कंपनी व folio लिख लीजिए।
- दावा करने वाले के नाम पर demat खाता खुलवाइए, और बैंक खाते से Aadhaar जुड़वाइए।
- हक़ के सबूत इकट्ठे कीजिए, और वारिसों के मामले में क़ानूनी काग़ज़ भी।
- IEPF-5 ऑनलाइन दाख़िल कीजिए, SRN लिख लीजिए, और फ़ाइल nodal officer को डाक से भेजिए।
- portal पर डाक रसीद दर्ज कीजिए, फिर हर महीने लिखकर याद दिलाते रहिए।
- किसी एजेंट को 5 से 15 प्रतिशत देने से पहले यह काम ख़ुद करके देखिए। प्रक्रिया थकाने वाली है, नामुमकिन नहीं।
7 साल की सीख
IEPF में पहुँचा हर शेयर वहाँ एक ही तरह से पहुँचा है: एक पता जो किसी ने बदलवाया नहीं, एक डिविडेंड जो किसी ने बैंक में जमा नहीं किया, एक निवेश जिसके बारे में किसी ने परिवार को बताया नहीं। 7 साल की चुप्पी, और क़ानून ने शेयर आगे सरका दिए। Parampara इसीलिए है कि वह चुप्पी शुरू ही न हो: हर folio, हर demat खाता और हर नॉमिनी, एक ऐसे वॉल्ट में लिखा हुआ जिसे सिर्फ़ आपका परिवार खोल सकता है।
जो भी हो, आपके परिवार को पता होगा कि कहाँ देखना है।
इस लेख में जिन चीज़ों की बात है, उन सबके लिए Parampara एक निजी, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड वॉल्ट है: पॉलिसियाँ, खाते, वसीयत कहाँ रखी है। हम उसमें कुछ नहीं पढ़ सकते। आपका परिवार पढ़ सकता है, जब ज़रूरत पड़े।
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